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Friday, June 11, 2010

मैं और मेरी बुआ-२

प्रेषक : गॅप
जब हम शादी में से वापस आए तो मैंने सोचा कि अब मैंने बुआ के साथ उपर का मज़ा ले लिया। फ़िर मुझे लगा कि यार ये सब ग़लत हो रहा है। रानी मेरी बहन लगती है उसके साथ किया। गौरी मेरी बहन लगती है उसको भी चोदा। और ये भी मेरी बुआ लगती है इसको भी ऊपर से चोद दिया। इसीलिए मैंने सोचा के अब मैं रानी, गौरी और बुआ के साथ नहीं करूँगा। और मैंने इनके बारे में ग़लत सोचना छोड़ दिया।
लेकिन, कुछ दिनों के बाद बुआ का फोन मम्मी के पास आया। मम्मी ने मुझे बताया के मुझको रात में बुआ के घर जाना है क्योंकि फूफा जी और उनका लड़का एक शादी में गये हैं। मैं फिर बुआ के घर चला गया।
मैं जब बुआ के घर में घुसा तो बुआ सामने ही बैठी थी। उस ‍‍दिन उसने काली साड़ी और काला ब्लाउज पहन रखा था। मैं सामान्य था क्योंकि बुआ, गौरी और रानी का ख्याल मन से निकाल चुका था। बुआ उठी और मेरे लिए खाना लेकर आई। हम खाना खाने बैठ गये। खाना खाते वक्त बुआ ने अपनी साड़ी को उपर किया और बुआ इस तरह से बैठ गई कि मुझे उसकी चूत दिखाई दे। पर मैने ध्यान नहीं दिया।
ख़ाने के बाद बुआ बोली- रात के दस बज गये हैं, अब सो जाते हैं।
मैं बेड पर लेट गया और बुआ भी मेरे बराबर में आकर लेट गई। मै सोने की कोशिश कर रहा था। उस कमरे के बाहर की लाइट जल रही थी। जिससे कमरे में बहुत रोशनी हो रही थी कि सब साफ दिख रहा था। मैं आज चुपचाप लेटा हुआ था। मेरी आँख थोड़ी खुली थी थोड़ी बंद थी। एक दम मुझको झटका लगा। जब बुआ ने अपना पैर मेरे पैर से छुआ। पर मैंने सोचा कि बुआ सो चुकी है। और मैंने अपना पैर अलग कर लिया।
फिर थोड़ी देर बाद बुआ खड़ी हुई और उसने अपनी साड़ी उतार दी। और वो पेटिकोट और ब्लाउज में लेट गई। उसने सोचा कि मैं सो चुका हूँ। मुझको दोबारा झटका जब लगा जब उसने अपनी गांड को मेरे लंड पर छुआ दिया। पर मैं चुप अपने मन पर काबू करके पड़ा रहा।
बुआ इस हरकत से मुझको जगाना चाहती थी। पर मैने कोई हरकत नहीं की। बुआ को बुरा लगा और बैठ गई और बोली आज 'बुआ चोद' सो रहा है। जब मेरा मन आज चुदने का कर रहा हैं तो आज 'बुआ का लंड' सो रहा है और उस दिन मेरे मना करने पर भी खुद ही कर रहा था।
और फिर, बुआ ने अपने ब्लाउज के हुक खोल दिए। आज बुआ ने कॉटन की काली ब्रा पहन रखी थी। फिर बुआ मेरी तरफ मुंह करके लेट गयी। और अपना एक हाथ मेरे अंडरवियर के उपर से मेरे लंड पर रख दिया। मुझको फिर झटका लगा और मैंने उसका हाथ अपने हाथ से हटा दिया।
फिर बुआ बोली- मुझको आज तुझको चोदना पड़ेगा।
मैं तो उसकी बोली सुनकर दंग रह गया कि बुआ ऐसी बोली बोल रही है।
फिर उसने अपने एक हाथ से मेरे अंडरवियर से मेरा लंड निकाल लिया। अबकी बार मैंने बुआ को कुछ नहीं कहा और बस सोचता रहा कि क्या करूँ? बुआ ने मेरे लंड को अपने कोमल हाथ से सहलाना शूरु कर दिया। मैंने अपनी आँख खोली तो बुआ बोली आज तेरा मन नहीं कर रहा है क्या?
तो मैंने कहा- तुम मेरी बुआ लगती हो।
तो उसने कहा- उस दिन तो तू मुझको रंडी समझ रहा था।
और वो बोलते बोलते मेरे लंड की मूठ मार रही थी। मेरा लंड भी अब खड़ा होने लगा था। मैं भी एक मर्द हूँ। कब तक मैं मन पर काबू रखता। फिर भी मैंने बुआ का हाथ पकड़ कर अपने लंड से अलग कर दिया।
फिर बुआ बोली- मुझको आज तुझसे हर हाल में चुदना है। क्योंकि आज मैंने तेरे लिये ब्लू फिल्म देखी है।
फिर मैंने उससे कहा- तुम मेरी बुआ हो उस दिन जो हुआ वो ग़लत था। और जब तुमको सब पता था तो तुमने मुझको रोका क्यों नहीं?
बुआ ने कहा- मैं तेरे लंड को देख कर गरम हो गई थी। और तेरे लंड की दीवानी भी। क्योंकि आज तक मुझको इतना मोटा और लम्बा लंड कभी भी नहीं मिला हैं। क्योंकि तेरे फूफा के सिवाय मैं आज तक किसी और से नहीं चुदी हूँ। और उसका लंड तो बहुत छोटा और पतला हैं। और वो बस मुझको चोदता हैं और सो जाता है चाहे मैं झड़ूं या ना झड़ूं। उसका लंड ठीक से अन्दर नहीं जाता है जिससे मुझको सही मजा नहीं आता है और मैं हमेशा तड़पती रहती हूँ। और कभी उंगली से तो कभी लम्बे बैंगन से अपनी प्यास बुझाती हूँ। तूने भी उस दिन खुद तो मज़ा ले लिया और अपनी बुआ को तड़पते हुए छोड़ दिया। पर आज सुबह जब तेरा फूफा मुझको चोद कर खुद ही झड़ कर चला गया और मुझे बिना झड़े छोड़ गया तो मैं ब्लू फिल्म देखने लगी तो मुझको तेरा ख्याल आया कि तू भी तो मुझको चोदना चाहता हैं।
फिर उसने अपनी ब्रा उपर की और मेरे मुंह में अपनी चूची का दाना देने लगी। फिर मैंने अपना मुंह बंद कर लिया।
उसने कहा- तू मुझको मत चोद पर जो मैं कर रही हूँ वो तो करने दे। वरना मैं तेरी उस हरकत के बारे में सब को बता दूँगी।
और मैं डर गया। और मैंने कहा जो करना है कर लो। और मैं चुपचाप पड़ा रहा। पर मैं आज सच्ची में बुआ के साथ नहीं करना चाहता था।
फिर बुआ ने मेरा अंडरवियर उतारा और मेरे लंड की खाल को आगे पीछे करने लगी। यानी वो मेरी मूठ मार रही थी। और अपने एक हाथ से अपनी चूत में उंगली कर रही थी। फिर बुआ ने मेरे लंड को अपनी चूची के बीच में फंसाया और अपनी चूची को मेरे लंड से चोदना शुरू कर दिया।
अब मेरा लंड पूरा खड़ा हो चुका था। फिर मैंने बुआ को अलग कर दिया। पर आज तो बुआ मुझसे अपनी चूत की प्यास बुझाना चाहती थी। फिर बुआ उठी और उसने अपने पेटीकोट का नाड़ा खोल दिया और उसे उतार दिया। बुआ ने नीचे मिनी स्कर्ट पहनी हुई थी। क्योंकि बुआ नर्स हैं। ‍इसी कारण वो अपने घर पर पेटीकोट के नीचे स्कर्ट पहनती है। और बुआ अपने घर पर ‍अधि‍कतर स्कर्ट और ब्रा में ही रहती हैं ताकी जब भी क्लीनिक पर जाना हो तो बस नर्स वाला गाऊन पहना और चल दी। जो उसने अपने घर के बाहर के कमरे में खोल रखा हैं।
अब बुआ ने अपनी स्कर्ट उठाई और मेरे लंड बैठने लगी तो मैंने उसको धक्का दिया और जाने लगा। पर बुआ तो आज एक मर्द की तरह हो रही थी। और उसने मुझको अपनी तरफ खींचा और मेरे लंड के ऊपर चढ़ कर बैठ गयी। अब मैं अपने आप को छुड़ाने की कोशिश करता रहा।
तो बुआ ने मुझे दो थप्पड़ मारे और बोली- चोद अपनी बुआ को।
फिर उसने अपने हाथ से मेरे हाथ पीछे किए और अपनी साड़ी से बेड से बाँध दिए। फिर उसने अपनी स्कर्ट उपर की और मेरे लंड पर अपनी चूत रगड़ने लगी। उसकी चूत से चिकना और गरम पानी निकल रहा था।
करीब दस मिनट बाद मेरा लंड पूरा खड़ा हो गया। अब उसने मेरे लंड को हाथ में पकड़ कर सीधा खड़ा किया और अपनी चूत को मेरे लंड पर रख कर बैठ गयी। मेरा पूरा लंड उसकी चूत में बिना किसी रुकाबट के अंदर चला गया।
फिर बुआ हँसी और बोली- बोल ! बुआ लंड ! आ रहा है मज़ा।
मैं चुप पड़ा रहा।
फिर वो बोली- मैं तुझको बहुत मज़ा दूँगी। जब भी तेरा मन चूत मारने का करे तो तू बता देना तेरी ये रंडी आ जायेगी। फिर बुआ मेरे लंड पर धक्के लगाने लगी। बुआ ने अपनी ब्रा से एक चूची को निकाली और मेरे मुंह में दे दी और बोली- आज तू इस रंडी का दूध भी पी।
मैं उसकी चूची पी नहीं रहा था। तो बोली- बुआ चोद ! पी इसे !
मैं डरकर उसे पीने लगा। बुआ की चूची एक दम सख़्त हो गई थी। अब बुआ को मज़ा आने लगा था। फिर वो उठी और उसने अपनी चूत को पौंछा। मैंने सोचा कि वो झड़ चुकी है पर पता ही नहीं था कि वो अभी भी झड़ी नहीं है।
फिर उसने मेरे लंड को अपनी ब्लाउज से पौंछा और बोली- अब मैं अपनी चूत को सुखा लूं।
फिर उसने अपनी चूत को एक दम सुखा लिया। वो बोली- ले अब सुखी चूत मार। अपनी बुआ की सूखी चूत मारने में तुझको बहुत मज़ा आएगा। और वो मेरे खड़े लंड पर बैठ गई। उसने एक बार में ही पूरा लंड अपनी चूत में ले लिया। और वो ज़ोर ज़ोर से धक्के लगाने लगी।
करीब दस मिनट बाद मैं झड़नेवाला था तो मैने कहा- मैं झड़ने वाला हूँ।
तो वो रुक गई। फिर उसने पाँच मिनट बाद धक्के मारने शुरू किये। अब की बार बुआ पूरा लंड बाहर निकालकर जड़ तक लंड को पूरा अंदर कर रही थी। और धक्के भी ज़ोर से मार रही थी। बुआ की स्पीड बढ गई और वो मुझसे चिपक गई। मैं भी बुआ से अपने आप चिपक गया। हम दोनो एक साथ झड़ चुके थे। बुआ मेरे कान में बोली- आया अपनी इस रंडी बुआ को चोदने में मज़ा।
उस रात बुआ ने मुझे तीन बार चोदा और हम तीनो बार एक साथ ही झड़े। बुआ ने मेरा सारा पानी अपनी चूत में ही छुड़वाया था। फिर सुबह को बुआ नहाकर चाय बनाकर लाई और बोली- रात कैसी रही?
मैं बोला- बुआ मैं तो अपने मन से तुम्हारा ख्याल निकाल चुका हूँ, मैं बहुत शर्म महसूस कर रहा हूँ।
फिर बुआ बोली- ठीक है। अब ऐसा दोबारा नहीं होगा। उस दिन तूने मुझको चोदा और आज मैने तुझको चोद दिया। हिसाब बराबर तुझको शर्म आती है तो ठीक हैं। और बुआ वहाँ से अपने क्लीनिक पर जाने के लिये तैयार होने के लिये चली गई।
पर फिर मैंने दिन में बुआ की गांड भी मार ली। ये अगली कहानी में।
अगर आपको कहानी अच्छी लगी हो तो आगे लिखूंगा।
मेरा ई-मेल
gap4u11@yahoo.com

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